स्वर्ण अनुसंधान/कीमियागिरी
केमिस्ट्री Vs कीमियागिरी/रस विज्ञान/धातु परिवर्तन
केमिस्ट्री को सभी जानते हैं व्यावहारिक दृष्टि से इसे विज्ञान मानते हैं लेकिन क्या यह सही है कुछ विद्वानों का मत है के केमिस्ट्री एक भाषा मात्र है पदार्थो को समझने हुई खोजों और विज्ञानिको के क्रिया कलापों उनके अनुसंधान की समझ का पर्याय मात्र भर है ,जैसे एक अबोध बालक को किसी सरल सुगम भाषा की जरूरत होती है वैसे ही केमिस्ट्री है जो हुई खोजों को बताने मात्र का साधन है लेकिन केमिस्ट्री कोई नई वस्तु का निर्माण नहीं कर सकती ये कीमियागिरी रस विज्ञान और धातु परिवर्तन की आधुनिक दृष्टि नहीं है बल्कि एक भाषा है जो व्यहारिक नियमो को दर्शाती है,जैसे शोरे का पानी,सिरके का रस जिसे एसिडिक माना जाता है ,क्षार, लवण, और समस्त केमिकल रिएक्शन को दर्शाती है अब आपको ज्ञान हो गया होगा के केमिस्ट्री बस आधुनिक रस विज्ञान की भाषा मात्र है जिसे विज्ञान उन सभी के दृष्टकोण से माना जा सकता है क्यूंकि वे लोग उस अबोध बालक की तरह हैं जिनको रस विज्ञान की समझ नहीं है तो इस आधुनिक रस विज्ञान की भाषा से पदार्थो को समझने का प्रयास करते हैं । विद्यार्थी जीवन से केमिस्ट्री को पढ़ते आए हैं जानते आए हैं के पदार्थ क्या है , ज्ञात सभी तत्वों के गुण उनके प्रयोग और परिणाम ,अब जानिए मैंने केमिस्ट्री को भाषा क्यूं कहा वजह साफ है के केमिस्ट्री ने कुछ नया नहीं खोजा रस विज्ञान की देन है और रस विज्ञान से को मिला उसी को बताता है चाहे रदर फोर्ड हो ,मैडम क्यूरी हों या कोई विज्ञान का प्रयोग कर पदार्थो को तोड़ने और अणुओं, परमाणुओं, प्रोटानो,न्यूटरानो इलेक्ट्रॉन की व्याख्या ,जिससे यह भी समझ में आ जाता है के केमिस्ट्री कहीं कहीं पे धातु परिवर्तन और रस विज्ञान का मिला जुला आधुनिक रूप है लेकिन पूरी तरह से विज्ञान मानने में थोड़ा भ्रम हो जाता है वजह साफ है रस विज्ञान अनवरत खोजें कर रहा है धातु परिवर्तन लाखो वर्षों से हुआ है ,नागार्जुन हों या पंडित कृष्णपाल शर्मा जी,पारद विज्ञान के जानकार भी धातु परिवर्तन को ही प्राथमिकता देते हैं लेकिन रस विज्ञान और धातु परिवर्तन पारद विज्ञान को इतना गूढ़ बना दिया गया के लाखों लोग अपनी वर्षो की मेहनत लगा कर भी धातु परिवर्तन नहीं कर सके किन्तु कुछ आश्रमों में सिद्घ लोगों ने कुछ समय में ही कर दिखाया ,धातु परिवर्तन होता है लेकिन इस विद्या या विज्ञान को छुपा कर रखना इतना भी सही नहीं है हमारी भावी पीढ़ियां हमें क्षमा नहीं करेंगी फिर भी मान्यता यही है के किसी गलत हाथों में जाने से इसका दुरुपयोग हो सकता है ,उदाहरण स्वयं देख लीजिए परमाणु बम जिसे खोजा तो गया था , यूरेनियम,थोरियम जैसे तत्वों से विद्युत उत्पादन करने के लिए लेकिन लोगों ने विनाशकारी बम बनाया शायद ऐसी ही किसी अनहोनी को देखते हुए धातु परिवर्तन का ज्ञान भी अछूता रह गया धातु परिवर्तन बस कुछ लोगों ने है किया और दुरुपयोग के भय से सार्वजनिक नहीं किया ,तभी तो पारद विज्ञानी भी एक अच्छे सत्यकर्मी शिष्य को ढूढने का प्रयास करते हैं यह सही भी है क्यूंकि शक्ति सही हाथों में जाए तो मानव कल्याण वरना विनाश को निमंत्रण ।

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